व्यवस्था करनेवाला

आयोजक
विबग्योर एन.ई. फ़ाउंडेशन, जो नीति आयोग (नीति दर्पण विशिष्ट आईडी: AS/2019/0248583) में पंजीकृत है, पर्यावरणीय एवं सतत विकास पहलों में अग्रणी संस्था रही है। 2016 में प्रथम नॉर्थईस्ट हरित शिखर  आयोजित करने के बाद से ही यह संस्था पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक धरोहर को जोड़ते हुए समग्र दृष्टिकोण से सतत विकास को बढ़ावा देने में अग्रणी रही है।

वर्षों के दौरान यह सम्मेलन एक महत्त्वपूर्ण आयोजन के रूप में विकसित हुआ है, जिसमें पूर्वोत्तर भारत और छत्तीसगढ़ में नौ संस्करण सफलतापूर्वक आयोजित किए गए हैं। इसमें विचारक, नीति-निर्माता और जमीनी स्तर के परिवर्तनकारी सहभागी होते हैं। सततता पर तकनीकी सत्रों, प्रकृति-प्रेरित सांस्कृतिक कार्यक्रमों और जनजातीय परंपराओं, कला एवं संस्कृति को समाहित करने वाली गतिविधियों के माध्यम से इस सम्मेलन ने सार्थक संवाद और ठोस कार्रवाई को प्रोत्साहित किया है।

संस्था सतत आजीविका को बढ़ावा देती है और जनजातीय परंपराओं, मूल्य-प्रणालियों एवं जनजातीय तकनीकों के संरक्षण हेतु कार्य करती है। समुदायों को पर्यावरण-अनुकूल उद्यमिता के अवसर प्रदान कर तथा पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक सततता के अभ्यासों में समाहित कर यह संस्था पर्यावरणीय एवं सामाजिक-आर्थिक विकास की दिशा में ठोस प्रगति कर रही है।

2024 में संस्था ने छत्तीसगढ़ हरित शिखर का प्रथम आयोजन किया, जो मध्य भारत में सततता के प्रति इसकी प्रतिबद्धता का महत्त्वपूर्ण कदम था। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर संस्था ने ‘ग्रीन इंडिया, क्लीन इंडिया’ के मार्गदर्शक विषय के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक अखंडता को सुदृढ़ करने का संकल्प दोहराया।

पृष्ठभूमि

छत्तीसगढ़ के लोग परंपरागत रूप से प्रकृति के साथ सामंजस्य में जीवन जीते आए हैं। किंतु हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन के कारण असामान्य मौसम और वर्षा ने राज्यवासियों के जीवन को गहराई से प्रभावित किया है। मुख्यतः कृषिप्रधान राज्य होने के कारण, जहाँ 80% जनसंख्या कृषि पर निर्भर है, वर्षा की अनियमितता—कभी देर से, कभी जल्दी या कभी कम—ने सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय स्थिति को प्रभावित किया है।

राजधानी रायपुर को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आँकड़ों के अनुसार 2014 में भारत के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में तीसरे स्थान पर रखा गया था। कोयला खदानों और ताप-विद्युत संयंत्रों के कारण वायु, जल और मिट्टी में विषैले धातुओं की उपस्थिति ने जनजीवन को प्रभावित किया है।

वन सर्वेक्षण के अनुसार राज्य का वन क्षेत्र 2011 में 55,674 वर्ग किलोमीटर था, जो पिछले वर्ष घटकर 55,621 वर्ग किलोमीटर रह गया। जनसंख्या वृद्धि और अपर्याप्त वर्षा इसके प्रमुख कारण हैं।

2025 में आयोजित होने वाला छत्तीसगढ़ हरित शिखर का द्वितीय संस्करण इन चुनौतियों पर विचार-विमर्श करेगा तथा जनजातीय परंपराओं के माध्यम से जलवायु परिवर्तन से निपटने की सफल कहानियों को सामने लाएगा।

विशेषज्ञता एवं अनुभव

विबग्योर एन.ई. फ़ाउंडेशन ने आठ नॉर्थईस्ट हरित शिखर  और एक छत्तीसगढ़ हरित शिखर  का सफल आयोजन किया है। इन सम्मेलनों से सतत विकास हेतु महत्त्वपूर्ण अनुशंसाएँ प्राप्त हुई हैं। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और आईआईटी गुवाहाटी सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ इसमें सम्मिलित रहे हैं।

एक उल्लेखनीय उपलब्धि ग्रामीण जैव संसाधन परिसर (RBC) की स्थापना रही है, जो हाइलाकांडी (असम) में स्थित है। यह परियोजना जैव-उद्यमिता को बढ़ावा देती है और स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के अवसर उत्पन्न करती है।

2024 में आयोजित प्रथम छत्तीसगढ़ हरित शिखर में पर्यावरण संरक्षण, आर्द्रभूमि पुनर्स्थापन, कार्बन क्रेडिट तंत्र और गैर-लकड़ी वन उत्पादों के सतत औद्योगिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया।

पूर्व सहयोग

वर्षों से यह सम्मेलन विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों और सरकारी निकायों के सहयोग से आयोजित होता रहा है। प्रमुख साझेदारों में आईआईटी गुवाहाटी, एनआईटी रायपुर, एनआईटी सिलचर, एनआईटी अरुणाचल प्रदेश, बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया, रेन फ़ॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, और आईबीएसडी शामिल हैं।

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP), संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम, भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों तथा राज्य पर्यटन विभागों का सहयोग भी प्राप्त हुआ है।

समग्र उद्देश्य

यह सम्मेलन विचारकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योगपतियों, नीति-निर्माताओं, छात्र संगठनों, नागरिक समाज, मीडिया और एनजीओ को एक मंच प्रदान करेगा ताकि छत्तीसगढ़ राज्य की पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान हेतु ठोस रणनीतियाँ तैयार की जा सकें।

पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक विधियों के समन्वय से यह सम्मेलन सतत विकास का एक समग्र एवं समावेशी मॉडल प्रस्तुत करेगा, जो छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और पारिस्थितिक संपदा को संरक्षित और विकसित करने में सहायक होगा।

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